तुम जब हंसती हो
तुम जब हंसती हो तो फूल झड़ते हैं
और न जाने कौन—से कयामत के पल पलते हैं।
तुम्हे देख देख कर कुछ सपने
मै भी बुन लेता हूं।
तुम मेरी लाइफ में न आओ तो अच्छा है
क्योकिं चांद के अनेक रूप जमीं से ही अच्छे लगते हैं।
तुम जब हंसती हो तो फूल झड़ते हैं
न जाने कौन कौन से विचार उमड़ते हैं।
—भगत सिंह पंथी
