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बुधवार, 9 मार्च 2011

कोई तो इन इंश्योरेंस कम्पनीयों के विज्ञापनों से बचाये

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  दिन भर आॅफिस में मथापच्ची करने के बाद घर पहँुचते हैं फे्रश होते हैं पत्नी से भोजन लगाने के लिये कहते हैं कुछ बच्चों से बतियाते हैं फिर कुछ शुकुन के लिये अपना मनपसंद टीवी चैनल लगाते हैं थोड़ी देर शो का मजा लेने के बाद अपना कंसन्ट्रेश्सन भोजन पर लगाते हैं। हम जिस तनाव से दिन भर गुजरते हैं रात के भोजन को ग्रहण करते हुए उस तनाव को कम महसूस करते हैं उसी समय इन इंश्योरेंस कम्पनियों के विज्ञापन उस शो के बीच में तनाव यकायक बढ़ा देते हैं कुछ विज्ञापन जैसे

1. एक अच्छे खासे व्यक्ति से एक  वंदा कहता है कि दिखते हो इतने लाख के हो और इंश्योरेंस इतने लाख का तुम्हे तो बीमारी है

2. एक पत्नि अपने पति से पैसा मांगती है अपने बड़े होते बच्चे के लिये और फिर उस आदमी को बुढा दिखाते हुए उस विज्ञापन में उसकी पत्नी उससे बच्चे की फीस के लिये लाखों माँगती है यह सुनते ही शायद आदमी बेहोश हो जाता है या मर जाता है

3. दो दोस्त अपनी फेमली के साथ ठहल रहे होते हैं और एक दूसरा दोस्त अपने पहले दोस्त से पूछता उसकी बच्ची के भविष्य के किसी बडे कॉलेज में एडमिशन के लिये। फिर वह दोस्त सोचने लगता है अपनी बच्ची के भविष्य की एजुकेशन के बारें में फिर उस की चिंता का हल उस बीमा कंपनी का बड़ा लोगो मोनो दिखा कर उसका हल उस कम्पनी की पॉलिसी हो सकती है या एकमात्र वही कम्पनी हो सकती है ये हमें बताया जाता है
बस फिर क्या हमारी धर्मपत्नि हमारा मँुह तकने लगती है जैसे पूछ रही हो के अपने बच्चों और अपने भविष्य का क्या होगा और हमारा भी दिमाग एक दम से प्रतिदिन इस तरह के विज्ञापन देख कर भविष्य की चिंता से घिर जाता है। मै ये नही कह रह हूँ कि इन कम्पनियों को अपना विज्ञापन नही करना चाहियें पर इस तरह लोगों को डरा कर ये कम्पनियों एक यूलिप पॉलिसी हम मिडिल क्लास को दे देती हैं। और उनका प्रीमियम भी ज्यादा होता है, इस तरह ये हमें एक ज्यादा इंश्योरेंस लेने की बीमारी का आदी बना देती हैं जब कुछ सालों बाद हम पता करते हैं कि उन यूनिट्स की क्या वेल्यू है तो हमारे पैरों तले जमीन ही खिसक जाती है जब कम्पनियों से पूछते हैं तो वे सत्रह तरह के पॉलिसी खर्च बता देती हैं। मै किसी तरह इन कम्पनियों या यूलिप पॉलिसियों का विरोध नही कर रहा हँू पर ये इस तरह के विज्ञापन दिखा कर लोगों को अपनी पॉलिसी लेने के लिये फोर्स करने से ज्यादा कुछ नही इन कम्पनियों को अपना उन संतुष्ट ग्राहकों का प्रतिशत या अनुभव इन विज्ञापनों के माध्यम से दिखाना चाहिये जिन्होनें इनकी पॉलिसी ले रखी हैं न की हम मिडिल क्लास को कंगाली से अमीरी का ख्बाव दिखा कर। दिखने को तो हम लाखों के भी न दिखें लेकिन हमारी वैल्यू करोड़ो की होती है इसका मतलब ये नही कि हम अपनी पूरी सेलरी इन कम्पनियों को प्रीमियम भर कर अपने बच्चों के भविष्य के लिये या अपने भविष्य के लिये हम अभावों में जियें । इसकी क्या गारंटी है कि बच्चों की फिस यदि लाखों में ही लगेगी तो क्या ये कम्पनियाँ केवल बच्चो की फीस भरने के लिये ही हमे अपनी पॉलिसियाँ बेच रही हैं तो फिर हम अपने बुढापे के लिये पैसा कहाँ से लाएँगे। ये कम्पनियाँ उन बेसिक इंश्योरेंस प्लान्स को क्यों  नही बताती जिसको लेकर भी आम आदमी अपना भविष्य सुरक्षित कर सकता है। और वो भी कम प्रीमियम देकर ।
रही सही कसर ये नूडल्स और बिस्किट्स के विज्ञापन पूरा करते हैं जो केवल लंच बाक्स या ब्रेकफास्ट में बच्चों को बिस्किट और नूडल्स खाने पर ही जोर डालते हैं । सुंदर माडल्स को मम्मी के रूप में दिखा कर उनसे कहलवाते हैं कि मै तो अपने बच्चे को लंच में ये ही देती हूँ, या खानें ब्रेकफास्ट में इन सब चीजों को बच्चों को खिलाने से कोई समझौता नही करती । और लम्बे और तेज दिमाग के लिये खास तरह के चाकलेट्स मिक्स पाउडर । अगर हम रोज अपने बच्चों को ये सब खिलायेगें तो रोटी दाल और सब्जियाँ तो बच्चे देखकर ही डरने लगेगे। अभी तो केवल न खाने के लिये ही बहाने मारते हैं।



आजकल एक विज्ञापन टीवी पर आ रहा है जिसमें एक सुंदर सी मम्मी दूसरी सुंदर मम्मी से पूछती है कि कैल्शियम के लिये अपने बच्चे को क्या देती हो तो वह कहती है दूध देती हूँ, तो वह पूछती है कैल्शियम के लिये क्या देती हो तो वह फिर बोलती है कि दूध देती हूँ, तो लास्ट में वह कहती है मै कैल्शियम बच्चे को मिल सके इसलिये बोर्नबीटा विटामीन डी वाला देती हूँ। कुछ दिनों बाद एक विज्ञापन और आयेगा जिसमें यह दोनों इसी तरह का वार्तालाप करेगी और पूछेगीं कि आयरन के लिये क्या देती हो तो दूसरी बोलेगी कि पालक देती हँू तब दूसरी बोलेगी कि मै मैगनेट (चुंबक) का चूरन मिक्स बोर्नबीटा देती हँू ताकि बच्चे को आयरन मिल सके। इन कम्पनी वालों का बस चले तो ये पैदा होते से ही माँ के दूध के साथ बोर्नबीटा की पहल करने लग जायें।

इस लेख का उद्ेश्य किसी कम्पनी के उत्पाद की बुराई करना नही हैं। ये मै केवल अपने अनुभव लिख रहा हँू।


SBI LIFE

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