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गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

आखिर ये लूट कब बंद होगी।

हम भारतवासियों की मजबूरी है टीवी पर एड देखना और एड देखने के हर माह पैसे भी चुकाना। अरबों रूपयें का करोबार करने वाले ये लोग टीवी चैनल्स दिखाने वाली कंपनियों को सबक्रिप्शन प्राइस कम करने को भी नही कहते। और जो हमारे देश का सरकारी डीडी डायरेक्ट प्लस है वहां वे चैनल्स लिस्टिड ही नही है जिन्हे हम देखना चाहते हैं।

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

जिंदगी की एक सीख

एक वंदा आज से लगभग 3 साल पहले एक दुकान पर मात्र 3500 रू. प्रतिमाह की नौकरी करता था। मेरा लगभग हर दूसरेे दिन उससे मिलना होता था। उसने बताया कि वह केवल नाम के लिये नौकरी करता है पिता जी के पास कई एकड जमीन है लेकिन उसे खेती किसानी नही करना। इसलिये नौकरी कर टाइम पास कर रहा है। तो मैने लगभग एक साल तक उसे मोटिवेट किया स्वयं का बिजनेस शुरू करने के लिये। उसे अपने आफिस जहां मै जॉब करता था वहां 2—3 बार बुलाया उसके साथ कई तरह के बिजनेस के बारे में विस्तृत सर्च किया। अंतत: उसने उस दुकान से नौकरी छोड एक बिजनेस स्टॉर्ट कर ​दिया। लेकिन उसने मुझे बताया तक नही। मुझे तीन माह बाद पता पडा कि उसने एक दुकान ले कर एक बडा फायदा का बिजनेस शुरू कर दिया है। मैने उसे फोन लगाया उसने मेरा फोन नही उठाया। फिर लगभग एक साल बाद मुझे भी अपना बिजनेस स्टॉर्ट करना था। तो मैने सोचा उससे एक बार मिल कर देखना चाहिये कि उसमें बिजनेस करने पर क्या चेंज आया। मैने उसकी दुकान का पता ​​एक वंदे ​से लिया और उससे मिलने पहंुचा। उसके पास बात करने तक का समय नही था। उसने मुझे नेगलेक्ट किया मतलब मेरी उपेक्षा की। मुझे खुशी तो हुई कि मेरे मोटिवेशन का असर इस वंदे पर तो पडा।
आज अचानक वह वंदा रात 9:30 बजे मेरी दुकान पर आया उसे एक होडिंग डिजाईन करवाना था। क्योकि वह अपने समाज में एक पद पा गया था जिसकी कि उसे पब्लिसिटी करनी थी। होडिंग बहुत अर्जे्ंट था उसे पता ​था कि मै उसका काम मिनटो में कर दूंगा वह अपने साथ कुछ साथियों को भी लाया। लेकिन मैने उसे मना कर दिया उसका चेहरा देखने लायक था। उसने मुझसे बहुत विनती की और कहा मुंह मांगे पैसे देने को वह तैयार है  लेकिन मैने सख्ती से उसे मना कर दिया वह चुपचाप चला गया।

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

बैंकों में shift pattern में काम क्यों नही हो सकता

मै यहां एक ऐसा मुद्दा उठा रहा हूं जिससे हम सभी देशवासियों को फायदा हो सकता हैं समय बच सकता है और देश की अर्थव्यवस्था दुगनी रफतार से चल सकती है।
हमारे देश में रेल्वे जो कि अपने लगभग 99 प्रतिशत कर्मचारियों से shift pattern में काम लेती है। बीएचईएल भी अपने कर्मचारियों से shift में काम लेती है। और भी बहुत से विभाग हैं जो कि अपने कर्मचारियों से shift में काम लेते हैं। तो सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बैंको से shift में काम क्यो नही लेती? और shift का समय हो सकता है प्रात: 7 से सायं 3 बजे तक एवं सायं 3 से रात 11 बजे तक। इससे ये फायदा होगा कि जो प्राइवेट या सरकारी कर्मचारी हैं उन्हें बैंक के कार्य निपटाने के लिये अलग से समय नही निकालना होगा। आप ही सोचिए जब प्राइवेट और सरकारी कर्मचारी अपने कार्यालय में पहुंच कर कार्य शुरू करता है तब बैंक खुलते  हैं आपने भी देखा होगा कि अधिकतर लोग सुबह-सुबह बैंक के कार्य निपटाने के चक्कर में लेट हो जाते हैं या महिने में कम से कम 2 बार तो उन्हें आधे दिन बैंक में ही समय देना होता है। इससे रोजगार भी मिलेगा लोगों को। बैंक अपने संसाधनों को जो कि 24 घंटे लगातार यूज किये जा सकते हैं से ज्यादा काम ले सकता है। कर्मचारियों को एक साथ अवकाश न देते हुये उन्हें रेल्वे की तरह बीकली आॅफ दिया जा सकता है जिससे कि हम भारतवासियों को रविवार के दिन भी अपने बैंकिंग कार्य निपटाने का अवसर मिल सकता है आप ही सोचिये हमारे देश में कितना बडा चेंज आ सकता है।
जब महिलाएं अस्पतालों में सिक्योर अनुभव कर ​कार्य कर सकती हैं तो बैंको में भी उनसे कार्य कराया जा सकता है। या फिर उनके सामने आप्शन दिये जा सकते हैं।
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