Saturday, March 3, 2012

ऊँ शांति: शांति: शांति:

शांति पाना है लेकिन पायें कैसे? सबसे पहले तो इस उदाहरण को समझें जैसे जब आप किसी मोमबत्ती या गलती से गर्म तबे पर अंगुलियां छू देने पर जलन का अनुभव करते हैं तो आप उस पर ठंडा पानी डालते हैं या अत्यधिक ठंडा यानि बर्फ का पानी ही डालने लग जाते हैं जिससे कि आपको शांति और शुकुन का अनुभव होता है और आपका दर्द कम हो जाता है। इसी तरह यदि कोई हल्की सी चिंगारी भी हमारे घर में किसी चीज को जलाने लग जाती है तो हम उस पर पानी डालते हैं। और वह बुझ जाती है। इसी तरह गर्मियों में हम जब दोपहर में बाहर से घर में आतें है और हमारे शरीर से पसीना बह रहा होता है तो हम ठंडे पानी को पीने के लिये प्रवृत्त होते हैं। इसी तरह हम भी हमारे जीवन में यही तरीका अपनाकर अपने दिमाग को शांत कर सकते हैं अंतर बस  इतना है कि हमें पानी से नही अपने मस्तिष्क को सततÞ शांत रख कर पूरे शरीर को शुकुन और हानिकारक हार्मोन्न उत्पन्न करने से बचाके रखना है जिससे कि हमारे शरीर के शैल नष्ट होते हैं । जब भी कोई कार्य हमारे अनुसार न हो रहा हो तो पहले उसके आपके

Tuesday, February 28, 2012

स्वयं को कमेंट्स और समस्या प्रूफ बनाये दृढ़ इच्छा शक्ति से

हम जब भी कोई सामान खरीदते हैं तो सेल्समेन हमें बताता है कि ये शॉक प्रूफ या जंगरोधी है या ये वाटर प्रूफ है या जब हमें सेल्समेन ये बताना है कि फलां प्लास्टिक का सामान कितने भी जोर से जमीन पर फेंक दें टूटेगा नही और वह सेल्समेन उस प्लास्टिक को फेंककर दिखाता हैं कि वह नही टूटता तब हमें उस सामान पर भरोसा हो जाता है और हम उसे खरीद लेते हैं। यही बात यदि हम अपने व्यक्तित्व या आत्मविश्वास के लिये अपनाये तो हम पर दुनियादारी का असर नही हो सकता। हमें चापलूस प्रूफ बनाना होगा ताकि कोई हमारी चापलूसी का हम पर असर नही डाल सके, हमें भड़काऊ प्रूफ बनना होगा ताकि कोई हमें किसी के प्रति भड़का न सके ।