बुधवार, 18 मई 2022

भोपाल प्रशासन हेतु सुझाव

 यहां मैं प्रशासन को कुछ सुझाव देना चाहता हूं यदि ये चेंज लागू कर दिए जाएं। तो भोपाल एक चेंज अनुभव करेगा।

1. भोपाल के जो दो मुख्य रेलवे स्टेशन है रानी कमलापति और भोपाल जंक्शन यहां पर गुटखा और सिगरेट के सेवन पर बैन लगा देना चाहिए और यह नियम पालन करवाने के लिए एक-दो हफ्ते की फॉर्मेलिटी निभाने से अच्छा है इसे पूरे साल कड़ाई से पालन करवाया जाए स्टेशन परिसर से लगी हुई जो दुकानें हैं वहां पर भी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाए क्योंकि बाहर से आने वाला व्यक्ति नहीं जानता कि यहां सिगरेट और तंबाकू के सेवन पर प्रतिबंध है वह यहां पर खरीद लेगा। 

रेलवे स्टेशन के बाहर और अंदर आप देखेंगे तो हर जगह गुटका थूका हुआ मिलेगा । और जो लोग यहां आस-पास दुकानों पर खड़े होकर सिगरेट पीते हैं उनकी वजह से दूसरे लोगों को सांस के साथ सिगरेट का धुआं पीना पड़ता है। अगर दुकानों के आसपास या स्टेशन परिसर में बड़े-बड़े बोर्ड लगा दिए जाएं तो भी आधे लोग सुधर जाएंगे। 


2. भोपाल की जो मेन कोलार पाइप लाइन थी जिसे बंद कर दिया गया है उस में जगह-जगह वाल्ब थे जिससे कि लोग भीषण गर्मी में पानी भरकर पीते थे उनकी जगह या फिर भोपाल की जो मुख्य सड़के हैं उन पर हर 5 किलोमीटर या 3 किलोमीटर पर एक सरकारी नल लगा दिया जाए जिसमें कोलार या नर्मदा जल आए तो हर प्यासे व्यक्ति को पानी मिल सकता है और यह ठेले वाले भी गंदा पानी यूज करने से बच सकते हैं। कृपया ध्यान दें कि प्याऊ ना बनाएं गंदगी होती है और कुछ दिनों बाद बाकी बंद हो जाता है सरकारी नल में बहता हुआ पानी लोगों का भरोसा कायम करता है। 

नर्मदा जल की जो टंकियां है वहां नीचे सरकारी नल लगाया जाए जो कि 24 घंटे चालू रहे ताकि जिन कॉलोनियों में लोग हार्ड हार्ड वाटर मजबूरी में पीकर बीमारियां पाल रहे हैं वे कुछ अपना समय नष्ट करके यहां से पीने योग्य पानी भर कर ले जाएं। इस चीज की आवश्यकता है नए भोपाल में सबसे ज्यादा है 


3. भोपाल के जो मुख्य चौराहे हैं वहां पर रेड लाइट में यदि कोई गुटखा थूकता है तो उसके वहां चालान बनाया जाए गाड़ी मालिक का नहीं , गाड़ी में बैठे गुटका खाने वाले का। 


4. बिजली विभाग जो मेंटेनेंस के नाम पर पेड़ों को एक साइड से काटता है दूसरे साइड से झुकते जाते हैं और आंधी तूफान में गिर जाते हैं । हरियाली भोपाल की नष्ट हो रही है उस पर कुछ किया जाए।


5. भोपाल की जो मुख्य सड़कें हैं जहां पर हैवी ट्रैफिक है वहां पर बोर्ड लगाया जाए कि यहां पर ठेले अलाउड नहीं है लगाने पर जुर्माना लिखा हो तो शायद भोपाल की सड़कों पर एक्सीडेंट कम हो। भोपाल की सड़कों पर लोग ठेला फुटपाथ पर ना लगाकर मेन रोड पर सीधा न लगा कर आड़ा लगाते हैं। 


4. भोपाल में रात को 11:00 के बाद सड़कों पर जो डंफर दौड़ते हैं 90% न में नंबर दिखता ही नहीं है या छुपा दिया जाता है। दुर्घटना होने पर पेपर में आता है कि अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी। डंपर की बॉडी में लेफ्ट और राइट में बहुत बड़े फोंट में कम से कम aadha किलोमीटर दूर से नंबर दिखाई दे ऐसा लिखा होना चाहिए। 


5. यदि यह सुझाव आपको पसंद आया हो तो अपने जान पहचान के लोगों में शेयर करें। लिस्ट बहुत लंबी है लेकिन अभी यह सुझाव काम कर जाएंगे।