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गुरुवार, 20 मार्च 2025

बच्चों को सुसाइड करने से कैसे रोका जाए

 पहले भोपाल में लगभग एवरेज एक व्यक्ति सुसाइड कर रहा था लेकिन अभी मैंने देखा है इस साल कुछ ज्यादा ही लोग महीने में सुसाइड कर रहे हैं एक दिन में लगभग दो या तीन। एक विशेष तरह का जो विषय है लोग फेल होने पर सुसाइड करते हैं अगर शिक्षा के क्षेत्र में गवर्नमेंट यह नियम लागू कर दे की कोई फेल नहीं होगा केवल सप्लीमेंट्री आएगी तो लोग एकदम से आत्मघाती कदम ना उठा पाएंगे। क्योंकि अधिकतर स्कूलों के छात्र अपने अभिभावक का पैसा खराब होने पर सदमे में आते हैं उन्हें लगता है उसी क्लास में दोबारा उनके मां-बाप का पैसा फिर से लगेगा। 

पूरे साल भर स्कूल  अभिभावक को हर तरीके से चीटिंग कर करके पैसा निकलवाते रहते हैं पढ़ाई के नाम पर कभी प्रोजेक्ट के नाम पर कभी बिल्डिंग के नाम पर खेल कूद के नाम पर। अगर गवर्नमेंट स्कूल में अनिवार्य कर दे कि साइकोलॉजी मतलब मनोविज्ञान टीचर रखने के लिए और उससे ऐसा पेपर डिजाइन करवाया जाए ऑब्जेक्टिव टाइप का या डिटेल हर महीने हर क्लास का टेस्ट लिया जाए और उनसे घुमा फिरा कर क्वेश्चन किया जाए कि फेल होने पर उनका अगला कदम क्या रहेगा। तो उससे पता पड़ सकता है कि यह बच्चा फेल होने पर सुसाइड करेगा या कुछ दोबारा मेहनत करने की कोशिश करेगा इस तरह से हम बच्चों को सुसाइड करने से रोक सकते हैं। एक सबसे सरल तरीका है । बच्चों को एक कहानी सुनाई जाए इस तरह के बच्चों की सुसाइड करने की फेल होने पर। और बच्चों से ही पूछा जाय कि उन्होंने सही किया या गलत किया? इससे भी कुछ सुसाइड प्लान वाले बच्चे पकड़ में आ सकते हैं। और इसी कहानी के माध्यम से उन्हें बताया जाए की सुसाइड करने वाले बच्चों के मां-बाप को किस तरह से सदमा लगता है और घर कैसे बर्बाद होता है।

और एक तरीका का है कि हर क्लास के हिसाब से साइकोलॉजी बुक गवर्नमेंट तैयार करें और हर क्लास में अनिवार्य कर दे और उसका भी एक पेपर हो। रिजल्ट डिक्लेअर करने से पहले उस साइकोलॉजी के पेपर को अध्ययन करके उन बच्चों की निगरानी बढ़ाई जाए या उसके अभिभावक को बताया जाए कि वह फेल होने पर क्या कर सकता है। मेरे हिसाब से स्कूलों में नियम चेंज करके बोर्ड के एग्जाम में लगभग पांच बार रेगुलर मौका दिया जाना चाहिए यहां तो 2 साल बाद ही बच्चों को यकीन दिला दिया जाता है कि अब वह बोर्ड का एग्जाम नहीं दे पाएंगे। और एक सबसे ज्यादा अच्छा तरीका यह है की फेल होने पर अगली बार फीस में 50% की छूट दी जानी चाहिए।

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