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मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

कमल कीचड़ में नहीं कीचड़ से ऊपर खिलता है

बचपन से पता नहीं स्कूल वालों ने या घर वालों ने ये कांसेप्ट मेरे दिमाग में बैठा दिया था, कि कमल कीचड़ में खिलता है. ये कांसेप्ट हिंदी व्याकरण के नजरिये से गलत था.कल मेरा कांसेप्ट क्लेअर हुआ की कमल कीचड़ में नहीं कीचड़ से ऊपर खिलता है.हम भेड़ चाल  चलते हैं,हमे अपने माहोल से कुछ ऊपर  उठ कर अपनी सोच में जैसे भी हो सके निखार लाना चाहिए. जिस तरह कमल भगवन के चरणों में पहुच जाता है उसी प्रकार हमे हमेशा गलत संगत से दूर रहते हुए अपनी लाइफ को परिवर्तन के लिए हमेसा प्रयत्नशील रहना चाहिए. भले ही हमारे पास पैसों की घोर कमी हो ज्ञान रूपी धन को हमेशा बढ़ाते रहो. क्योकि जो अपनी सहायता करता है, परमात्मा उसकी सहायता करता है. आपके कर्मो के फल तो केवल आपको ही भोगना पड़ेंगे. रात दिन भगवन को कोसना बंद करों. और हमेशा ये याद रखों की यदि आपको कहीं किसी अच्छे महात्मा की सत्संग की वाणी अच्छी लगती है और हमेशा आप उसे सुनने के लिए उत्सुक रहते हो तो अवश्य ही आपने पूर्व जन्मों में अच्छे कर्म किये थे. इसकी शुरुआत आप प्रतिदिन सूर्य उदय से पहले उठकर कर सकतें हैं. 
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  जब भी आपको प्रात: ब्रह्म मूहूर्त में उठने की आदत डालनी हो या सुबह जल्दी उठने की तो सबसे पहले घड़ी में अलार्म या मोबाईल में अलार्म लगाकर सोते समय इनकों अपने सोने के स्थान से इतना दूर रखें की जब आपको सुबह अलार्म बंद करना हो तो आपको उठना पड़े। अलार्म घड़ी या मोबाईल में अपने पास रखकर न सोये नही तो आप अलार्म बजने पर अलार्म का गला घोंट कर दुबारा नींद में खो जायेंगे।
 
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                                     ये हमारी गलत फहमी है कि भगवान् केवल प्रार्थना करने या संकट के समय ही हमारी सहायता करतें हैं.भगवान् तो बिन बुलाये आकर   भी संकट से कोसों  दूर  पहले भी आपको  बचा  लेतें  हैं जिस  संकट का आपको  भान   भी नहीं होता. 

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