शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

आज 13 दिन बाद बिगड़े हुए मलेरिया से राहत मिली free from malaria fever

आज 13 दिन बाद बिगड़े हुए मलेरिया से राहत मिली, स्वास्थ्य लगभग 50 प्रतिशत गिर गया, चेहरा काला पड़ गया, खाना का स्वाद चला गया। घर पर खटिया पर पड़े-पड़े समझ आया कि जितने पैसे मैने डाक्टरों को दिये उतने पैसे के यदि मै इस माह अपनी सेहत के लिये सेवफल जो कि 70 रू किलो मिल रहें हैं खाता तो 10 किलो तो खा ही लेता। घर पर रह कर दीपावली देखी तो लगा जैसे लोग दिपावली पर लक्ष्मी को बुलाते कम है, जो लक्ष्मी उनके जेब और प्रोपट्री, गहनों के रूप में है उसका दिखावा ज्यादा करते हैं। लेकिन वे भूल जाते हैं कि अब एक दिन चला जायेगा। मैने एक आंकडा पढा कि हमारे देश में केवल 8 प्रतिशत लोग ही सरकारी क्षेत्र में नौकरी करते हैं। और सरकार के जो भारी भरकम बोनस हैं केवल 8 प्रतिशत लोग ही उसका पूरा मजा लेते हैं। खासकर बीएचईएल में कार्यरत लोग। बाकी 92 प्रतिशत लोगो में 51 प्रतिशत लोग उद्यमी हैं जो लक्ष्मी को विवश कर देते हैं उनके पीछे आने के लिये। बाकी बचे लोग प्राइवेट सेक्टर में अपनी जिन्दगी को जिये जा रहे हैं किसी चमत्कार की आश में जहाँ न तो सेलरी बढ़ने का कोई नियम है न बोनस देने का। इस बीच मुझे जो अनुभव हुये मै यहाँ लिख रहा हँू। जब शुरू में मेरा स्वास्थ्य खराब हुआ तो मैने होम्योपैथी के डॉक्टर से इलाज  करवाया उसने वायरल फीवर का इलाज किया लेकिन वो डॉक्टर 4 दिनों में ये नही जान पाया कि मुझे मलेरिया है जबकि मैने रोज उसे जाकर ये बताया कि जो दवाई वह दे रहा है उसका कोई फायदा नही हो रहा। फिर मैने अवधपुरी, बीएलईएल में जो झोलाछाप डाक्टरों की एसी क्लिीनिक खुली हुई हैं वहाँ दिखाया तो केवल उन लोगों ने जेब ही खाली की, चंूकि बीएचईएल क्षेत्र में जो हॉस्पिटल हैं वहाँ इलाज काराना उन लोगों के लिये मंहगा है जो बीएचईएल में नौकरी नही करते है अत: मैनै थकहार कर और ये सोचकर कि कहीं लम्बी खटिया नही पकड़ लँू, पुराने भोपाल जहाँ मेरा बचपन बीता है वहाँ के डॉक्टर को दिखाया जिससे मेरे माता पिता ने बचपन से मेरा इलाज करवाया है। हालांकि इन डॉक्टर महोदय को दिखाने के लिये भोपाल के एक कोने से दूसरे कोने तक का सफर तय करना पड़ता है दिखाया तो उन्होंने ब्लड टेस्ट करवाने के लिये लिखा और उनकी क्लिीनिक में ही अन्य किसी पैथालॉजी लेब के काउंटर पर मैने ब्लड टेस्ट करवाया जिसकी रिपोर्ट दूसरे दिन मिली जिसमें मलेरिया डिटेक्ट हुआ। फिर इन्ही डाक्टर महोदय की दी हुई ढेर सारी दवाईयाँ और 3 दिन रोज जाकर इंजेक्शन लगवाया तब कहीं आराम पड़ा। इस बीच मेरा लगातार 3 दिन उस मोहल्ले से निकालना हुआ जहाँ बचपन में मैने होश सम्भाला था वहाँ मैने उस मोहल्ले को लगभग वैसा ही पाया जैसा कि 1984 में गैसकांड के समय था बस कुछ बिल्डिंगे बन गई थी सड़के वैसी की वैसी थी, लोग जिन पर बुढापा छा गया था। हरियाली साफ हो चुकी थी एक अघोषित गुड़ा जो हम बचपन से बीच रोड पर देखते आये थे अभी वहाँ था। इस मोहल्ले का नाम है कैंची छोला भोपाल।

भोपाल में एम.पी. नगर, प्रेस काम्प्लेक्स में भास्कर प्रेस के सामने नवदुनिया की ऊपरी फ्लोर पर जो म.प्र. शासन का मलेरिया डिपार्टमेंट है जहाँ मलेरिया की जाँच होती है जाने वहाँ का हाल - मै जैसे तैसे बुखार की हालत में तीन मंजिल चढकर वहाँ मलेरिया का टेस्ट कराने पहुंचा वहाँ आॅफिस में मलेरिया के पोस्टर चिपके हुये थे। बहुत बड़ा आॅफिस था लेकिन कोई ये बताने वाला नही था कि मलेरिया की जाँच कौन करेगा एक महिला एक कोने के चेम्बर में फोन पर बतिया रही थी मैने उनसे कहा कि मलेरिया की जाँच करवानी है तब उन्होंने मेरा नाम आदि रजिस्टर में नोट किया और एक सुई से एक स्लाईट पर खून का सेम्पल ले लिया तब मै सोच में पड़ गया कि उस पैथोजॉली लेब वाले ने तो एक सीरिंज और स्लाईड दोनों पर खून का कुछ सेम्पल ले लिया था और इन मेडम ने तो केवल एक जरा सी बंूद ही काँच पर ली। तब उन महोदया ने एक कागज के टुकड़े पर जैसे आटे की चक्की पर चक्की वाला हमें एक छोटे से टुकडे पर यह लिख कर देता है कि कितने किलो गेहंू है, देकर कहा कि शाम को चार बजे आना अब मैने सोचा कि चार घंटे बाद घर से वापस आना बड़ी टेढ़ी खीर है अत: मै अपने आॅफिस आ गया और वहाँ किसी तरह चार घंटे बिताये उसके बाद वापस मलेरिया की रिपोर्ट लेने यहाँ आया लेकिन यहाँ तो एक बंद एसी हॉल में मीटिंग चल रही थी मै कम से कम आधे घंटे बैठा रहा। तभी वहाँ एक कर्मचारी को मुझसे सहानुभूति हुई और उसने बताया कि मेडम उस लेबरूम में लंच बैठीं है। तब उन महोदया ने बताया कि अरे मै तो भूल गई अभी टेस्ट करवा देती हंू और उन्होंने मात्र पाँच मिनिट में वापस आकर मुझे ये बताया कि रिपोर्ट नेगेटिव है तब मैने उन्हें बताया कि पैथोलॉजी लेब वाले ने तो मलेरिया बताया है तब उन्होंने कहा ठीक हो गया होगा तब मैने उन्हें कहा कि कृपया मुझे लिखित रिपोर्ट दें तब उन्होंने कहा कि वह पर्ची बताईये जो सुबह दी थी तब मेरी उनसे इस बात पर बहस हुई कि जब पैथोलॉजी लेब वाले अपने प्रिंटेड लेटर हेड पर रिपोर्ट दे रहें हैं तो आप केवल एक कागज के टुकडे पर नेगेटिव साइन बनाकर कैसे अपना पल्ला झाड़ सकती हैं तो उन्होंने कहा कि यहाँ रिपोर्ट नही दी जाती । मैने सोचा जान है तो जहान है निकलो यहाँ से।


08 NOV.11 BHASKAR BHOPAL

10 Nov.'11 bhaskar, bhopal

13 JUNE 2013
13 JUNE 2013

12 nov.'11 bhaskar bhopal



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