सोमवार, 5 अगस्त 2013

बच्चों को कैसे याकिन दिलायें कि जो दिखाया जा रहा है वो कभी संभव नही

Boring Indian TV channels
क्यों बच्चों के दिमाग में ये गलत प्रोग्रामिंग कर रहे हो भाई सुनों मै आपसे कह रहा हंू जो टीवी चैनल्स रात दिन साउथ की एक्शन मूवी दिखाने में व्यस्त है चाकू, तलवार बिना सोचे समझे विलन और हीरो एक दूसरे पर चला रहे हैं हीरो इतनी तेजी से वार करता है कि जमीन ही फट जाती है, दीवार टूट कर छिन्न भिन्न हो जाती है और पता नही क्या क्या हो जाता है जो विडियो गेम में होता है। हीरोइन एक हीरो पर फिदा हो जाती है, घर ही पत्नी हमेशा डरी रहती है कि कब विलेन आकर उसे सताऐगा। गाडिय़ां इतनी लक्जरी कि बच्चे कहते हैं पापा ये वाली गाड़ी कब खरीदोगे। अभी अभी मैने क्रिस ३ का ट्रेलर देखा उसमें ही वही एलियन, एक्शन अचानल हीरो का कहीं से प्रकट हो जाना ऐसे जैसे विडियो गेम को पर्दे पर उतार दिया हो।
हर संडे मै बुद्धू बक्से के सामने बैठता हंू इस उम्मीद मै कि  चलों कुछ मनोरंजन कर लिया जाये लेकिन वही रिपीट फिल्मे जैसे सूर्यवंशम, हम आपके है कौन आदि और आप सभी भी जानते होंगे हर चैनल पर हर संडे एक नई फिल्म आती है लेकिन फिल्म शुरू तो हो जाती है लेकिन फिल्म की आड़ में वही विज्ञापनों की बाढ़ बड़ी खींज होती है, एरिटेशन होता है, चिढ़ छूटती है। बच्चे कार्टून लगा लेते हैं फिर पत्नि बताती है कि ये तो बच्चे रिपीट देख रहे हैं और इन कार्टून चैनल वालों को भी अक्ल कम लगती है बडों वाले विज्ञापन जैसे क्रिम पाउडर, गैस वाले विज्ञापन जिसे लगाते ही लड़कियां आस पास घूमने लगती है विज्ञापन में दिखाते रहते हैं अब इन बच्चों को क्या मतलब इन विज्ञापनों से ।हम हिंदुओं के देवताओं को पूरी तरह कार्टून में कन्वर्ट कर दिया गया है पता नही क्या ऐंड बेंड कहानियों में भगवान को कार्टून के रूप में दिखाया जाता है। और बजरंगबली नाम के जो सीरियल्स आते हैं उन्हें देखकर लगता है कि सीरियल बनाने वाले को एक बार पकड़ कर पूछा जाये कि बता भैय्या ये तूने कौन सी किताब से पढ़कर सीरियल में गढ़ा है और क्यो हमारे बच्चों और नई जनरेशन को गलत दिखा रहा है। सास बहू के सीरिल्स की स्टाईल में क्यों भगवान के सीरियल्स बना रहा है। आजकल डिस्कवरी नेटवर्क वालों को भी भारतीय चैनल्स की हवा लग गई है वे भी एक के बाद एक विज्ञापन दिखाते ही चले जाते हैं।
हमारे देश ने नेशनल नेटवर्क यानि डीडी वाले चैनल्स से कल मैने देखा जो सत्यम् शिवम् सुंदरम् लिखा दिखाई देता था गायब हो गया है। हमारे देश की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी है लेकिन चैनल का नाम डीडी। जबकि अधिकारी ब्रदर्स के जो चैनल्स है जो बहुत ज्यादा पसंद किये जाते हैं उनके नाम शुद्ध हिन्दी में हैं जैसे दबंग, मस्ती। डीडी का एक चैनल है ज्ञानदर्शन लेकिन वहां हमेशा इंग्लिश में क्या चलता रहता है पता नही। मेरा एक सुझाव है कि ज्ञानदर्शन वालों को ये हाई फाई इंग्लिश के लेक्चर बंद कर बच्चों के लिये अ आ इ ई उ वाले और इंग्लिश स्पीकिंग और महिलाओं के लिये सिलाई कढ़ाई, कम्प्यूटर, आदि वाले कार्यक्रम दिखाना चाहिये स्थानीय भाषाओं में ताकि जो महिलाएं दिनभर सास बहू की तिकड़म में उलझी रहती हैं उनके पास भी देखने के लिये आप्शन हो और बच्चों के लिये भी।
और भी बहुत कुछ गलत दिखाया जा रहा है लेकिन सुझाव देने का आप्शन बंद है टीवी चैनल्स के लिये बिना मतलब काला पीला करने से कलम घसीटने से कोई मतलब नही। हां हम एक कदम जरूर उठा सकते हैं टीवी चैनल्स को ब्लॉक कर अपने नन्हे मुन्ने बच्चों के दिमाग में गलत प्रोगामिंग होने से और घर की महिलाओं को ये निर्देश दे कर कि भूत प्रेत वाले और घटनाओं के नाट्य रूपांतर वाले सीरियल्स बच्चों साथ न देखें। क्योकि हम तो दिन भर और कुछ समय रात को भी अपनी रोजी रोटी की जुगाड़ में लगे रहते हैं और घर पर एक ये टीवी ही है जो महिलाओं और बच्चों का प्रिय है। जो हमसे ज्यादा संस्कार इनमें डाल रहा हैं। हमें तो केवल संडे मिलता है। वो भी ये चैनल्स बर्बाद कर देते हैं। अभी ब्रोडबेंड या ३जी इतना सस्ता नही हुआ कि अपना मनचहा कार्यक्रम या फिल्में नेट पर देख सकें ।

अंत में मै यही कहना चाहता हंू कि विज्ञापनों में , फिल्मों में, हाॅरर शो में , जासूसी सीरियल्स में, बच्चों के परियों और कार्टून में झूठ दिखाया जा रहा है मनोरंजन के लिये और रात दिन, हर घंटे, दिन में सौ बार यही दिखाया जा रहा है। झूठ को यदि 100 बार किसी को बोला जाये तो वह झूठ उस व्यक्ति को सत्य लगने लगता है जैसे गोरा बनाने की क्रिम, टेली शापिंग के एड, आदि।

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