मंगलवार, 16 जुलाई 2013

जागो भाई सोने का समय नही है

जब हम रामायण, भागवत कथा, गीता हिन्दी में पढते हैं और सारे सास बहू के टीवी सीरियल हिन्दी में देखते हैं। डिस्कवरी नेटवर्क भी स्थानीय भाषा में प्रोग्राम दिखाता है तो एमबीए, इंजीनियरिंग और एमबीबीएस की पढाई हिन्दी में नही हो सकती क्या? हमारे आस पास भी हिन्दी मीडियम स्कूल गायब हो गये हैं। कभी आपने सोचा है कि डाक्टर्स हिन्दी में या स्थानीय भाषा में मरीज को दवाई का पर्जा क्यो नही लिखता। जबकि हमारे पूर्वज वैद्य कठिन से कठिन जडी बूटियों के नाम हिन्दी में लिख देते थे। हमारे देश में हर सर्वोच्च प्रशासनिक संस्था के चिन्ह में संस्कृत में श्लोक लिखे हुये है तो संस्कृत को बढावा देने के लिये स्कूल और टीचर क्यो नही दिखाई देते?

ध्यान दें
कार्टून चैनल्स हिन्दी में हैं।
मोबाईल में हिन्दी है।
फेसबुक में हिन्दी है
एटीएम में हिन्दी है
दूरदर्शन के ज्ञान दर्शन चैनल में अधिकतर प्रोग्राम इंग्लिश में हैं
डीडी भारती में में भी यही हाल है।
हमारे आस पास 90 प्रतिशत स्कूल्स इंग्लिश माध्यम में हैं।

21 JULY 2013

22 JULY 2013
27 july 2013

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