शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

कौन से न्याय की आस में इन आतंकवादियो को अदालतों में घसीट कर हमारे देश की अदालतों का टाइम खराब कर रहे हो।

  हमारी सरकार कह रही है कि ये आतंकवादियों की कायरतापूर्ण कार्यवाही है और हम आतंकवाद के आगे नही झुकेंगें, मेरा कहना ये है कि अगर आतंकवादियों को कायरतापूर्ण कार्यवाही करनी होती तो वे चाय की दुकान या किसी अन्य सुरक्षा रहित जगह को अपना निशाना बनाता न कि साहस दिखाते हुये हाईकोर्ट परिसर में विस्फोट करते है। सरकार कह रही है कि आतंकवादियों के सामने झुकेगें नही,तो क्या हमारी सरकार लोगो को बलि का बकरा बनाती जायेगी और जो आतंकवादी सरकारी मेहमान है,को केवल फाँसी का ख्वाव ही दिखायेगी या फाँसी पर भी चढ़ायेगी एक आतंकवादी के चक्कर में 12 लोगों का घर उजड़ गया। आप उन लोगों आतंकवादी भी मान चुके हो तो फिर कौन से न्याय की आस में इन आतंकवादियो को अदालतों में घसीट कर हमारे देश की अदालतों का टाइम खराब कर रहे हो। और क्यो उन देश पर मरमिटने वाले साहसी जवानों का मनोबल तोड़ रहे हो जो जान पर खेल कर इन्हे पकड़ते हैं।

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