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शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

बेरोजगारों को रोजगार

जात न पुछो साधु की, पूछ लिजिये ज्ञान।
तौल करो तलवार की, पड़ी रहन दो म्यान।।


       यदि हमारी सरकार भी यही बात अपनायें तो सभी बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है या ये कहें कि जो बेरोजगार सरकारी योजनाओं की पात्रता शो करने के लिये अपनी बाइक के टायर घिस रहें हंै उन्हें सरकारी योजनाआें का लाभ मिल सकता है जैसे कि आजकल न्यूज पेपर्स में आए दिन सरकारी विज्ञापन निकलते हैं कि बेरोजगारों हेतु इतने प्रतिशत सब्सिडी पर लोन उपलब्ध है। पर उस लोन को पाने के लिये आपके पास जाति प्रमाण पत्र होना आवश्यक है यदि बेरोजगार व्यक्ति अपने कॉलेज के जमाने के जाति प्रमाण पत्र को आवेदन के साथ संलग्न करता है तो उससे कहा जाता है कि नया जाति प्रमाण पत्र चाहिये तथा जीवित रोजगार कार्यालय का पंजीयन क्रमांक भी चाहिये ।
यहाँ से शुरू होता है गाड़ी के टायरो का घीसना और बेरोजगारों की पॉकेट मनी का लुटना।
यदि किसी तरह आपने अपना आवेदन किसी तरह पूर्ण कर भी लिया तो मार्जिन मनी या बैंक से लोन पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है (मैने कुछ दिन पहले एक न्यूज पेपर में पढ़ा था कि मार्जिन मनी सरकार देती है) किंतु आवेदन में आपसे पूछा जाता है कि आपकी कार्यशील पूँजी क्या है।
 मैने देखा है कि आप यदि कोई प्राइवेट सर्विस करते हैं और आपका कितना भी पुराना अकांउट किसी शासकीय बैंक हो तो भी यदि आप उस बैंक में आप आपनी आकस्किम जरूरतों के लिये लोन के लिये आवेदन  करते हैं तो वे आपको अधिकतर अयोग्य ठहराते है और कहते हैं कि यदि आप शासकीय सेवा में होते तो लोन दे देते।
आपको यह जानकर हैरत होगी कि यही हाल लगभग प्राइवेट बैंको का भी है। किंतु यदि आपका किसी प्राइवेट बैंक में अकाउंट है और उसी बैंक का के्रडिट कार्ड है तो वे आपको फोन पर ही यह कहते हुए लोन लेने की गुजारिश करते हैं कि आप इस लोन के लिये हमारी लिस्ट में हैं। और यदि आपने के्रडिट कार्ड पर लोन ले लिया और एक भी ईएमई समय पर नही चुकाई तो उस बैंक के रिकवरी एजेंट आपको घोर संकट में डालने में पूरी कोशिश लगा देते हैं।

यदि आप अनुसूचित जाति में आते हैँ और आपके पास स्थायी जाति प्रमाण पत्र है जो कि कांग्रेस के शासनकाल में म.प्र. शासन द्वारा जारी किया गया था। अब वह मान्य नही है यदि आपको अब भाजपा की सरकारी और केन्द्र की सरकारी योजनाओं का लाभ लेना है तो आपको जहाँ आपके दादा दादी रहते थे जहां आपके पिता ने बचपन गुजारा वहां का 50 साल का रिकार्ड जब तक उस तहसील के पास उपलब्ध नही होगा तब तक अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र नही दिया जाता मतलब कि अब अनुसूचित जाति के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिये जूते और गाड़ी के टायर घिसने पड़ते हैं और टाइम की बर्बादी होती है सो अलग। और भोपाल में जो नागरिकों की सुविधा के लिये लोकसेवा केन्द्र खोले गये है वहां जाति प्रमाण पत्र नही बनाया जाता।

जब हमारा पहली क्लास से वही जाति नाम वही चला आ रहा है जिसका सरकारी एजेंसियाँ प्रमाण पत्र माँगती हैं और तमाम बोर्ड एक्जाम भी हम उसी जाति नाम के साथ उत्तीर्ण करते हैं फिर क्यों सरकार बेरोजगारों को लोन देते समय यह पूछती है कि आपकी जाति क्या है पूछती क्या वो तो प्रमाण माँगती है क्या सरकारी विश्वविद्यालयो द्वारा जारी प्रमाण पत्र फर्जी होते है या कहें की सरकार को अपने ही द्वारा संचालित शिक्षण विभागों की कार्य शैली को झूठा साबित करना होता है। सरकारी तंत्र को इस ओर ध्यान देने की जरूरत हैं कि बेरोजगार व्यक्ति की शैक्षणिक  योग्यता क्या है जिसके लिये उसके अभिभावकों ने अपनी रातदिन की कमाई लगाई है।


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