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सब्जी तो रोज सब एक ही तरकारी की बनाते हैं फिर रोज सत्रह तरह के पेपर और न्यूज चैनल क्यो देखते हो भाई।
मामला ये है कि तरकारी तो सब तरफ एक ही पकती है लेकिन ये पता करने के लिये कि फलां सज्जन ने या बावर्ची ने कौन कौन से मसाले यूज किये हैं ये देखने के लिये पढते हैं भाई
-भगत सिंह पंथी
15 jan'2013

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अपने बचपन का पजामा तो हम अपने बच्चे को पहना सकते हैं लेकिन क्या भूत, प्रेत, परियों और अप्सराओं की कहानी सुनाना ठीक है. पजामा तो हमने देखा और महसूस भी किया है लेकिन क्या कभी इन काल्पनिक चरित्रों को देखा है?
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ब्रोकर या ओपरेटर गिरते हुए मार्केट में इंट्रा डे आपके लिए महंगे शेयर खरीद-बेच रहा है तो समझिये वह कम समय में ज्यादा ब्रोकेज कमा रहा है. भले ही आपने कुछ न कमाया हो उसने तो कमाई कर ली--------------------------------------------------------------------------------------------
एक आयुर्वेद की डिग्री लो, बाबा रामदेव के साथ एक फोटो खिचवाओ, क्लिनिक में लगाओ, क्लिनिक के बाहर लिखो फ्री परामर्श कोई शुल्क नही, क्लिनिक कम बाबाराम देव आयुवेदिक प्रोडक्ट की दुकान खोलों, रोगी को ढेर सारी दवाएँ लिखों क्योकि साइड इफेक्ट होना नही और कमाओ। और जनसेवा भी करो
कृपया नोट करें- ये मैने किसी दुर्भावना से नही लिखा है देखा है इसलिये लिखा है।
-भगत सिंह पंथी

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भोपाल में जो बड़े बड़े आश्रमो की जमीने और आश्रम धूल चाट रहे हैं जहाँ साल में १ बार या कई सालों तक कोई सत्संग नहीं होता वहां जन भागीदारी से साल भर यदि पुराणों, भागवत कथा, उपनिसद आदि का प्रवचन हो तो लोगों की लाइफ कुछ सुधरे. और वे अपने बच्चों को भी इससे लाभंभित कर सकतें हैं.
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आजकल जो मध्यप्रदेश में बीजेपी के मंत्री अपनी ही सत्ता में ब्यूरोक्रेट से नाराज होकर बयानवाजी कर रहें है उसको इसके माध्यम से समझें

एक बार एक मंत्री महोदय एक स्कूल में औचक निरीक्षण करने पहँुचे तो उन्होनें एक कक्षा में विद्यार्थी को खड़ा कर पूछा कि बताओ लंका किसने जलाई थी। विद्याार्थी बोला सर मैने नही जलाई तब उस मंत्री ने उपस्थित शिक्षक से पूछा ये क्या पढ़ा रहें है आप। तब शिक्षक ने कहा महोदय ये सत्य कह रहा है ये तो पूरे स्कूल समय में कक्षा में उपस्थित था। तब मंत्री महोदय ने प्रधानाचार्य को बुलाया और उन्हें स्थिति से अवगत कराया तब वे प्रधानाचार्य महोदय बोल सर क्यों नाराज होते हैं विभागीय जांच करवा लेते हैं पता पड़ जायेगा किसने लंका जलाई।
-भगत सिंह पंथी

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खाद्य महंगाई दर फिर 10% के करीब

लगता है आने वाले साल 2012 में दुनिया का नाश हो न हो अज्ञानियों का नाश जरूर हो जायेगा. multinational कंपनियों को हमारे देश से बोरिया बिस्तर बंधना पड़ेगा या मुफ्त में बाँटना (?) पड़ेगा.
आजकल मैं सब्जियां खरीदना बंद करने कि प्रक्टिस कर रहा हूँ. और फल खरीदने कि कोशिश कर रहा हूँ. क्योकि फल में नमक, तेल, मसाले नहीं डालने पड़ते, पकाने के लिए गैस भी नहीं लगती और बच्चे भी खा सकतें हैं.
-भगत सिंह पंथी
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  फर्ज निभाने  के लिये यदि किसी गैर सरकारी कर्मचारी या मध्यमवर्गीय परिवार के मुखिया ने कर्ज ले लिया वो भी होम लोन या के्रडिट कार्ड पर पर्सनल लोन तो समझों उसकी पूरी जिंदगी इन लोन की ईएमआई चुकाने में ही निकल जायेगी। और यदि बिल्डर ने धोखा किया तो समझों उस परिवार के मुखिया का हर्ष वही होता चला जाता है जैसे जलती हुई मोमबती का जो केवल बैंक की ईएमआई चुकाने के लिये ही जलती है। और जो के्रडिट कार्ड पर लोन लेकर पैसे चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं वे तो जीते जी मरे के समान अपने परिवार को लगने लगते हैं। ये कटु सत्य है। कु छ बैंको ने तो ऐसे रिकवरी वालों की सेवाएँ ले रखीं है जो ये कहते हैं कि "आपको भले ही ब्लड कैंसर हो आपको लोन तो चुकाना ही पड़ेगा"
-भगत सिंह पंथी
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आजकल भोपाल में नए नए ब्रांड के दूध प्लास्टिक की पाकिंग में मिल रहे हैं किराने वाले दुकानदार जो गली कुचारों में दुकानें डाले बैठे हुए हैं ज्यादा commision के चक्कर में इन packets को बेच रहे है. गलती से यदि हमारे घर ये packet मजबूरी में आ जातें हैं तो इस दूध की बनी चाय पीकर जब 'जी मचलाना और पेट संबंधी गुडगुड होने लगती हैं' तब हम सोच में पड़ जातें है कि क्या वास्तव में ये भैस का या गाय का दूध था या किसी मशीन का दूध.
-भगत सिंह पंथी

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ये फकीर इस तरह की दुआएं न जाने दिन भर मे कितने लोगों को देतें हैं. हमे अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए. जैसे आपको पता है की आपके कर्मचारी या आपके किसी पडोसी के घर मे किसी तरह की परेशानी चल रही है जिसका हल हमरे कुछ पैसो से हो सकता है तो हमे उसे देना चाहिए. उनलोगों की सहायता से बचना चाहिए जो साल के १२ महीने मांगते ही रहतें हैं. 
-भगत सिंह पंथी

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कब तक पत्थर पर फूल खिलाने निर्णय बरकरार रख सकते हैं जबकि आपके जीवन में समय कम है। समय रहते अक्ल से पर्दा यदि हटा लिया जाये तो दूसरे आप्शन तलाशे जा सकते हैं यदि आप्शन सूझ नही रहा है जो उस परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करें कि हमे सही राह दिखलाये। यदि हम गरीब पैदा हुये हैं तो ये हमारा भाग्य है और यदि हम गरीब ही मर जाते हैं तो ये हमारी गलती है। ये तो तय है कि भैंस के आगे बीन बजाते रहने से एक ना एक दिन निराशा ही हाथ लगेगी।

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आज दिन भर से बैंकों से आ रहे एसएमएस ने बार बार मोबाईल की ओर ध्यान खींचा । अक्षय तृतीया पर सोने के सिक्के 99 परसेंट शुद्ध सोने के खरीदें। अब इन बैंकों को कौन बताये कि सब्जी खरीदने के लाले पड़े हैं इतना मंहगा सोना कौन खरीदेगा वो भी टैक्स के साथ। ये सरकारी बैंक्स ये कभी नही कहती है वर्षों से आपका सेविंग एकाउंट हमारे बैंक में है लोन ले लो कम ब्याज दर पर। लोन के लिये तो सरकारी कर्मचारी या सफेद हाथियों की तलाश रहती है।
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यदि किसी दिन कोई वंदा आॅफिस में तेज डियो या सेंट लगाकर आ जाये और अपनी सीट पर बार-बार आड़ा टेड़ा हो रहा हो तो समझिये दाल में कुछ डाला है या दाल में कुछ काला है। हॉं यदि कोई वंदी या खूबसूरती का खजाना कुछ तेज सेंट रोज लगाकर आती हो तो समझिये वह आपसे कुछ छुपाती है और वंदों को बेवकू फ बनाती है, जाल में फंसाती है। शिकारी जंगल में आता है दाने का लोभ दिखाता है जाल में फंसना नही चाहिये।
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