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क्रेडिट कार्ड की रिकवरी Credit card recovery

क्रेडिट कार्ड की रिकवरी या हिटलर राज्य का प्रारंभ 
आज आम जनता या किसी मिडिल क्लास सर्विस मेन जिसने अपनी मुसीबत के समय किसी प्रायवेट या सरकारी बैंक द्वारा जबरजस्ती आग्रह द्वारा थमाए गये क्रेडिट कार्ड का उपयोग अपनी वित्तीय अवस्था से उबरने के लिये किया हो आज वो उस समय को कोसता है जब उसने अपने क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया। चूंकि वह इन क्रेडिट कार्ड या यूं कहे कि किसी शिकारी के जाल में फंस गया है जिसे किसी यहॉं तक कि रिजर्व बैंक की गाइड लाईन्स तक की परवाह नही हैं।
मेरा एक मित्र है जो यहीं भोपाल में रहता है (जिसकी एक छोटी सी फैमली है जिसमें २ बच्चे हैं तथा वह सेल्फ डिपेंड है उसकी सेलरी मात्र ६००० रू. माह है) जिसने एचडीएफसी बैंक के गोल्ड कार्ड पर रू. ५०००० का लोन अपनी मुसीबत के समय ले लिया था। चूंकि उसे कुल ४८ किश्तें चुकानी थी इसलिये उसने टाइम पर २३ किश्तें आसानी से चुका दी किंतु देश में आई मंदी की वजह से वह जिस कम्पनी में कार्यरत था वह बंद हो गई तब ले देके उसने किसी तरह अपने बचे हुये सेविंग फंड से किसी तरह और किश्तें चुका दी किंतु फिर भी उसकी अभी २५ के लगभग किश्तें बाकी हैं उसने मुझे बताया कि उसने इस माह अपनी आर्थिक तंगी की वजह से बैंक की किश्त नही चुकाई और अब उसके पीछे बैंक के कलेक्शन सेंटर से १ दिन में २० से २५ फोन लगातार आ रहे हैं जिससे उसे अपने जीवन में नकारात्मक सोच को काबू करने के लिये लगातार मनमंथन और कन्हीं से किसी तरह वित्तीय सहायता की उम्मीद के साथ जीवन व्यापन करना पड रहा है। उसने बताया कि ''इस माह मेने बैंक की किश्त अपने दोस्त से उधार लेकर किसी तरह चुका दी किंतु अब बैंक वाले मात्र ५०० रू. की पेनल्टी की रिकवरी के लिये मुझे फोन लगाकर कहते हैं कि ''आपकी केपेसिटी नही थी तो लोन क्यू लिया, आज ही पेमेंट करें किसी भी हालत में कहीं से भी लाये।हम तो ब्रेन ट्यूमर वालों तक को नहीं छोड़ते तुम अच्छे खासे हो.'' दिन में एकबार नहीं उसे हर घंटे बैंक के रिकवरी सेंटर से फोन आते हैं और हर बार वह कहता हैं कि आप अगले माह तक समय दें मैं किसी तरह ५०० तथा अगती किश्त दे दूंगा किंतु वे नही मानते हैं। उसने बताया कि उन्होंने एक दिन सुबह-सुबह मेरे घर रिकवरी प्रतिनिधी को भेज दिया और वह प्रतिनिधी मुझे फोन पर कलेक्शन सेंटर पर माजूद मेडम से बात करने हेतु फोर्स करने लगा तब मैने उस मेडम से बात कि तो वह बोली आप अभी इस प्रतिनिधि के साथ हमारे कार्यालय आयें.........................
उसने बताया कि एचडीएफसी के कलेक्शन सेंटर से अधिकतर महिलाओं के फोन आते हैं जो कि बड़े भद्दे तरीके से बातें करती हैं जैसे उनको शायद कस्टमर को तनाव देने की ही सेलरी या ट्रेनिंग दी जाती है। जो आपकी बिलकुल न सुन , अपनी ही सुनाती हैं।
तब उस मित्र ने रिजर्व बैंक की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने वाली के बारे में जानकारी हासिल की किंतु उसे वहॉं भी निराशा हाथ लगी उसने बताया कि ऑनलाईन शिकायत फार्म कम्पलीट भरने के बाद भी बार-बार कोशिक करने के बाद भी वह सबमिट नही होता।
आज कोई भी न्यूज पेपर या कोई नेता या कोई संस्था इन प्राइवेट बैंको की इस तरह की मनमानी के खिलाफ आवाज क्यूं नही उठाती। राजनैतिक खबरों के अलावा भी कुछ टॉपिक ऐसे हैं जिसे आम जनता पढना चाहती है। ये तो केवल एक व्यक्ति की समस्या है जिसे केवल ५०० रू. न देने पर इन बैंकों द्वारा इतना मानसिक कष्ट झेलना पड रहा । आप सोचिये कि जिसने इन बैंको का हजारो रू. नहीं चुकाया होगा उनका यह बैंक के रिकवरी वाले जीना हराम कर देते होंगे या आत्महत्या के लिये अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरित करते होंगे।


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28 dec'2012 bhaskar bhopal

18 april 2013 bhaskar bhopal

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